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Tuesday, August 20, 2024

शिव शंकर

शिव शंकर

(राजीव 'रंजन')


हे  नीलेश्वर अलख  निरंजन   प्रतिपालक   शिव   शंकर   हे

नीलकंठ    नीलाद्री     निलोत्पल,    नागार्जुन   नागेश्वर    हे

त्रिलोकनाथ  त्रिगुणा ‌ त्रिदेव  त्रिपुरारी  त्रिनेत्र  त्रिकालेश्वर  हे

अनादि अनुपम अगम्य अव्यय अखिलेश ओम ओंकारेश्वर हे


तुम   अनंत   जग    पालनकर्ता    विश्वनाथ   सर्वेश्वर    हो

मां  गौरी  के  उमापति,  कार्तिक   गणेश  के  पिता  जो हो

"शि" से तुम अभयदानी करुणाकर  और पाप विनाशक हो

"व" में  है वह  शक्ति  निहित,  भक्तों  के  कष्ट  निवारक  हो


ब्रह्मा की उत्पत्ति   तुमसे  ,  सृष्टि  के   हो   तुम  सृजन  हार 

विष्णु   तुम   हो, पालनकर्ता, विश्व के  हो तुम  परम आधार  

समुद्र  मंथन  से उदित   हुआ  मानव  के  पापों   का   गरल

कंठागत, विनाशक विष किया, हे नीलकंठ, सहज ही सरल 


त्रिनेत्र खुला, तोड़ा  जो  ध्यान तुम्हारा, कामदेव  भश्म  हुए

महाकाल  विकराल  का  तांडव नृत्य  फिर नटराज ने किए

ध्वस्त हो रही  थी  सृष्टि, जब  देवी  मां ने तुम्हें शान्त किया

मां शक्ति के आग्रह पर, कैलाश से आ काशी में वास किया


हे शिव शंकर, शिव लिंग है द्योतक सृष्टि के सृजन शक्ति का

ध्यानमग्न रहते तुम निरंत र समपुर्ण भक्ति से उस शक्ति का 

नमन  हमारा, हे  यजामह, कल्याण   मार्ग पर  मैं चल पाऊं

पा  प्रसाद  तुम्हारा   हे  प्रभु! अखंड  ज्योति  में  समा  जाउं

Thursday, August 8, 2024

दुआ



दुआ

समंदर में मिलने  की   आस  लिए  बैठा  हूं
दरिया बन, बहने का अहसास  लिए बैठा हूं
मिल   समंदर  में, कहां   वजूद   रह  पाएगा
जब तक हूं, जीने  की  प्यास  लिए  बैठा  हूं 

शहर की  खामोशी  में  कई राज़  छुपे बैठे हैं
गरीबों  के  आंसू  और अल्फाज़  छुपे  बैठे हैं 
अमीरों ने रसूक से अपनी भर  रखी  है झोली
इख्तियार हर तरफ दबी आवाज में छुपे बैठै हैं 

मसीहा आएगा ये पता सबको जाने कब  से है 
छंटेंगे ये गम के बादल, ये हवा जाने कब  से है
रहम करो अब तो आ जाओ दुनिया के मालिक
निजात दो हमें दुखों से, ये दुआ जाने कब से है 

राजीव "रंजन"
8 अगस्त 2021

Monday, May 20, 2024

इश्क - शादी के बाद

इश्क - शादी के बाद

क्या नाकाम इश्क ही, मुहब्बत की है मिसाल  
लोगों का है वो ख्वाब जो खुद है इक सवाल  
हदों को तोड़ ख़लिश सा अटका पड़ा दिलों में 
आरज़ू के पंख पसार है उलझा पड़ा रिवाजों में   

शीरी फरहाद, लैला मजनू, सोहनी महिवाल
हैं ये नाम, नाकाम इश्क के बेहतरीन मिसाल
क्यूं आम इंसान इश्क की मिसाल बन नहीं सकता
ज़िन्दगी से लड़ता प्यार का दामन थाम नहीं सकता

इश्क है चाहत, जो पनपता है, बढ़ता है धीरे-धीरे
अहसास बन छाता दिलों पर, उभरता है हौले-हौले
मीठी-मीठी बातों में छोटी-छोटी अदाओं में दिखता है 
भीनी मुस्कान में, हर पल की सदाओं में झलकता है 

जवां दिलों की धड़कन बन, उम्र के साथ आता है
प्यास जगाता हैं, चाहत बढ़ाता है, रोज तड़पाता है
चंचल मन, कहीं भटकता है, नयी चाह बन उभरता है
सपनों में लीन, सच से दूर, अनजान में अंटकता है

शादी-शुदा का भी तो इश्क है, उनके लिए बंदगी सा
रोजमर्रा के जद्दोजहद में भी करते हैं प्यार जिन्दगी
शादी है नहीं मकाम इस इश्क का, है यह आगाज
जिम्मेदारियों के बीच भी, प्यार का होता है परवाज

शादीशुदा का प्यार है फुलवारी जो मेहनत है मांगता
अपनापन की क्यारी, देखरेख और निगरानी है चाहता
सच्चाइयों की आग, जरुरतों की तपिश पर निखर
सोने की तरह, इश्क, जेवर सा ढल, बनता है प्रखर

बोली में मिश्री, आंखों में चाहत, दिल में बेकरारी
अटूट विश्वास, मन में आस, होंठों पे मुस्कान प्यारी
सुख में साथ, दुःख में बढ़ा, थामे मजबूती से हाथ
बीती बातें बिसार, प्यार की राह पर, रहता है साथ

दिखता जितना, शादीशुदा का इश्क, नहीं आसान उतना   
जो है जैसा,अपना, रोज़ प्यार जताना, है मुश्किल कितना
विश्वास के पाये, आदर की दीवार, स्नेह की छत चाहिए
प्यार के परिंदे को आशा के पंख,सपनो का आकाश चाहिए

इश्क के घरौंदे में साथ-साथ रहना, पास-पास नहीं होता
दिलों में खिंच, अनजान सी कसक का अहसास दे जाता 
आंखों से निकल, भीनी मुस्कान बन होंठों पे खिंचता है
जीवन में हर पल निखर, संवरता है, खुशियों में खिलता है

प्यार भरा दाम्पत्य, सुख के सपनो को साकार किए होगा 
सौहार्दपूर्ण माहौल बना, अभावों से परे, जीवन जिए होगा
जिम्मेदारियां बखूबी निभा, संतानों को सबक दिए होगा
भविष्य गढ़ा होगा, चाहत भरा होगा, स्नेह जिए होगा

राजीव सिंह
नोएडा
जनवरी २०२०